What is Centres Lathe in hindi

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What is Centres Lathe in hindi

 What is Centres Lathe in hindi

प्रश्न – चक (Chuck) किसे कहते हैं ?
उत्तर- चक, लेथ मशीन पर वर्क या जॉब (Work or Job) को पकड़ने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

प्रश्न – चक कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर- चक चार प्रकार के होते हैं
1- फोर जॉ चक (Four Jaw Chuck)
2- थ्री जॉ चक (Three Jaw Chuck)
3-कालेट चक (Collet Chuck)
4- चुम्बकीय चक (Magnetic Chuck)

प्रश्न – फोर जॉ चक और थ्री जॉ चक किसे कहते हैं ?
उत्तर- फोर जॉ चक (Four Jaw Chuck) – इसको इंडिपेंडेंट चक भी कहते हैं। इसमें चार जॉ होते हैं। प्रत्येक जॉ को चक की चाबी (Chuck key) द्वारा अलग-अलग चलाया जाता है इस चक के द्वारा जॉब को पकड़ा जा सकता है। इस चक पर प्रत्येक जॉ को उल्टा लगाकर बड़े साइज के जॉब को आसानी से पकड़ा जा सकता है।

थ्री जॉ चक (Three Jaw Chuck) – इसको यूनिवर्सल चक भी कहते हैं। इसमें तीन जॉ होते हैं जो चक की चाबी के साथ एक साथ चलते हैं। इस चक में जॉब को असानी से सेंटर में बांधा जा सकता है। उसका अधिकतर प्रयोग छोटे जॉब को पकड़ने के लिए किया जाता है। इस चक के साथ रिवर्सिंग जॉ (Reversing Jaws) का सैट भी आता है जिसका प्रयोग करके बड़े साइज के जॉब भी इससे बांधे जा सकते हैं।

प्रश्न – कालेट चक और चुम्बकीय चक किसे कहते हैं ?
उत्तर- कालेट चक (Collet Chuck)- इस प्रकार के चक का प्रयोग छोटे साइज के जॉब और पिनों आदि को पकड़ने के लिए किया जाता है। इसमें बेलनाकार, चौकोर, षटभुज आकार के जॉब आसानी से और जल्दी सेंटर में बांधे जा सकते हैं।

चुम्बकीय चक (Magnetic Chuck) – इस प्रकार के चक में जॉब को चुम्बकीय शक्ति द्वारा पकड़ा जाता है। इसका प्रयोग प्रायः पतले जॉब को पकड़ने के लिए किया जाता है।

प्रश्न – टूल पोस्ट (Tool Post) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
यह कटिंग टूल को पकड़ने का एक साधन है जिसे विभिन्न मशीनों पर प्रयोग किया जाता है तथा कार्य करते समय यह कटिंग टूल को बहुत मजबूती से पकड़ता है।

प्रश्न – टूल पोस्ट कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
टूल पोस्ट चार प्रकार के होते हैं
1- पिलर टाइप टूल पोस्ट (Pillar Type Tool Post)
2- फोर बोल्ट टाइप टूल पोस्ट (Four Bolt Type Tool Post)
3- ओपन साइड टूल पोस्ट (Open Side Tool Post)
4- टूरेट या मल्टी टूल पोस्ट (Turret or Multi Tool Post)

प्रश्न – लेथ सेंटर्स (Lathe Centres) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर लम्बे जॉब के दोनों किनारों को हैंड स्टाक और टेल स्टाक की ओर से सहारा देने के लिए लेथ सेंटर्स का प्रयोग किया जाता है। लेथ सेंटर्स प्रायः हाई कार्बन स्टील के बनाए जाते हैं जिनको हार्ड व टेम्पर करके ग्राइंडिंग फिनिश कर दिया जाता है।

प्रश्न – लेथ सेन्टर कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
लेथ सेंटर तीन प्रकार के होते हैं
1- लाइवं सेंटर (Live Centre)
2- डैड सेंटर (Dead Centre)
3- रिवाल्विंग सेंटर (Revolving Centre)

प्रश्न – लेथ स्टेडी (Lathe Steady) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर कार्य करते समय लम्बी तथा भारी छड़ के लचीलेपन के प्रभाव को रोकने के लिए जो साधन प्रयोग में लाया जाता है उसे लेथ स्टेडी कहते हैं। लम्बे कार्य का लचीलापन टूल के दबाव के कारण या कार्य के अपने भार के कारण हो सकता है। उसे केवल लेथ स्टडी के द्वारा रोका जा सकता है।

प्रश्न – लेथ स्टेडी कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर-
लेथ स्टेडी तीन प्रकार की होती है
1- ट्रेवलिंग स्टेडी (Travelling Steady)
2- फिक्स्ड स्टेडी (Fixed Steady)
3- रिवाल्विंग स्टेडी (Revolving Steady)

प्रश्न – लेथ सेंटर्स (Lathe Centres) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर लम्बे जॉब के दोनों किनारों को हैंड स्टाक और टेल स्टाक की ओर से सहारा देने के लिए लेथ सेंटर्स का प्रयोग किया जाता है। लेथ सेंटर्स प्रायः हाई कार्बन स्टील के बनाए जाते हैं जिनको हार्ड व टेम्पर करके ग्राइंडिंग फिनिश कर दिया जाता है।

प्रश्न – लेथ सेन्टर कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
लेथ सेंटर तीन प्रकार के होते हैं
1- लाइवं सेंटर (Live Centre)
2- डैड सेंटर (Dead Centre)
3- रिवाल्विंग सेंटर (Revolving Centre)

प्रश्न – लेथ स्टेडी (Lathe Steady) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर कार्य करते समय लम्बी तथा भारी छड़ के लचीलेपन के प्रभाव को रोकने के लिए जो साधन प्रयोग में लाया जाता है उसे लेथ स्टेडी कहते हैं लम्बे कार्य का लचीलापन टूल के दबाव के कारण या कार्य के अपने भार के कारण हो सकता है। उसे केवल लेथ स्टडी के द्वारा रोका जा सकता है।

प्रश्न – लेथ स्टेडी कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर
लेथ स्टेडी तीन प्रकार की होती है
1- ट्रेवलिंग स्टेडी (Travelling Steady)
2- फिक्स्ड स्टेडी (Fixed Steady)
3- रिवाल्विंग स्टेडी (Revolving Steady)

प्रश्न – लेथ कैरियर (Lathe Carrier) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ कैरियर एक प्रकार की लेथ असेसरी है जिसका प्रयोग दोनों सेंटर के बीच में पकड़े हुए जॉब को हैंड स्टाक स्पिण्डल के साथ घुमाने के लिए किया जाता है। ये प्रायः कास्ट आयरन या ड्राप फोर्ज स्टील के बनाये जाते हैं।

प्रश्न -लेथ कैरियर कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
लेथ कैरियर तीन प्रकार के होते हैं
1- स्ट्रेट टेल कैरियर (Straight Tail Carrier)
2- बैंट टेल कैरियर (Bent Tail Carrier)
3- एडजस्टेबल कैरियर (Adjustable Carrier)

प्रश्न – ड्राइविंग प्लेट और फेस प्लेट (Driving Plate and Face Plate) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- ड्राइविंग प्लेट (Driving Plate) –
यह वृत्ताकार प्लेट होती है जिसके ऊपर एक-दो पिन लगी होती हैं। इसमें ड्राइविंग पिन या बोल्ट को फिट किया जाता है। इस प्लेट की परिधि पर एक या दो खुले स्लाट भी होते हैं जिसमें वेट टेल कैरियर की टेल (Tail) फंस सकती है। ड्राइविंग प्लेट को लेथ के हैड स्पिंडल की चूड़ियों पर चढ़ाकर प्रयोग में लाया जाता है ।

फेस प्लेट (Face Plate) – इस प्रकार की प्लेट देखने में ड्राइविंग प्लेट की तरह होती है परन्तु साइज में कुछ बड़ी होती है। इस प्लेट पर वर्गाकार स्लाट या T स्लाट बने होते हैं। जिसमें वर्गाकार हैड वाले बोल्ट या T बोल्ट को आसानी से लगाया जा सकता है। फेस प्लेट का मुख्य प्रयोग लेथ पर ऐसे कार्यों को पकड़ने के लिए किया जाता है जिनको लेथ पर अन्य साधनों के द्वारा नहीं पकड़ा जा सकता। ये प्रायः कास्ट आयरन से बनाई जाती हैं।

प्रश्न – लेथ मैंड्रल (Lathe Mandrel) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ मैंड्रल एक प्रकार की असेसरी है जिसका प्रयोग उन कार्यों पर परिशुद्धता में टर्निंग करने के लिए किया जाता है जिन पर पहले से ही सेंटर में फिनिश किया हुआ सूराख बनाया जाता है। ऐसे कार्यों को मैंड्रल पर फिट कर दिया जाता है और मैंड्रल को लेथ पर दोनों सेंटरों के बीच में कैरियर के साथ पकड़ कर कार्य पर परिशुद्धता में टर्निंग की जाती है। जैसे किसी गिवर को बनाने के लिए पहले उसके ब्लॉक को बनाया जाता है फिर इस मैंड्रल के साथ ब्लॉक को मिलिंग मशीन पर बांधकर दांते काटे जाते हैं और अन्य क्रियायें की जाती हैं। मैंड्रल को प्रायः हाई कार्बन स्टील से बनाकर हार्ड व टेम्पर कर दिया जाता है।

प्रश्न -लेथ मैंड्रल कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
लेथ मैड्रल छः प्रकार के होते हैं
1- प्लेन मेंड्रल (Plain Mandrel)
2- टेपर मेंड्रल (Taper Mandrel)
3- कालर मेंड्रल (Collar Mandrel)
4- स्टेप मेंड्रल (Step Mandrel)
5- स्क्रू मेंड्रल (Screw Mandrel)
6- एक्स्पेंशन मेंड्रल (Expansion Mandrel)

प्रश्न – लेथ पर सामान्य कौन-कौन सी क्रियायें (Common lathe operations) की जा सकती हैं ?
उत्तर-
लेथ पर सामान्यतः निम्नलिखित क्रियाएं की जा सकती हैं
1- फेसिंग (Facing)
2- पैरेलल या स्ट्रेट टर्निंग (Parallel or Straight Turning)
3- स्टेप टर्निंग (Step Turning)
4- फार्म टर्निंग (FormTurning).
5- टेपर टर्निंग (Taper Turning)
6- असैंट्रिक टर्निंग (Eccentric Turning)
7- अण्डर कटिंग (Under Cutting)
8- नर्लिंग (Knurling)
9- पार्टिंग आफ (Parting off)
10- बोरिंग (Boring)
11- थ्रेडिंग (Threading)
12- ड्रिलिंग (Drilling)
13- रीमिंग (Reaming)
14- टैपिंग (Tapping)

प्रश्न – लेथ कटिंग टूल (Lathe Cutting Tools) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर विभिन्न प्रकार के कटिंग आप्रेशन करने के लिए कई प्रकार के टूल प्रयोग में लाये जाते हैं जिन्हें लेथ कटिंग टूल कहते हैं। लेथ पर प्रायः सिंगल प्वाइंट कटिंग टूल का प्रयोग किया जाता है। जिनको आवश्यकतानुसार गाइड करके बनाया जाता है। इसके अतिरिक्त लेथ पर कार्य के आप्रेशन के अनुसार मल्टी प्वाइंट टूल भी प्रयोग में लाये जाते हैं। जैसे ड्रिल,रीमर आदि।

प्रश्न – लेथ कटिंग टूल कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
यह तीन प्रकार के होते हैं
1- सॉलिड टूल्स (Solid Tools)
2- बिट टूल (Bit Tool)
3- टिप टूल (Tip Tools)

प्रश्न – सॉलिड टूल (Solid Tools) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
इस प्रकार के कटिंग टूल प्रायः हाई स्पीड स्टील के बनाए जाते हैं। यह क्रास सैक्शन या आयताकार होते हैं। यह सम्पूर्ण टूल एक ही धातु से बनाये जाते हैं इसलिए इसे सालिड टूल कहते हैं। इसको टूल पोस्ट में प्रत्यक्षतः बांधकरं प्रयोग में लाया जाता है।

प्रश्न – बिट टूल (Bit Tool) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
बिट टूल 5 से 15 मि० मी० वर्ग तथा 75 से 150 मि०मी० लम्बाई के मिलते हैं। इस प्रकार के टूल को हाई स्पीड स्टील में कोबाल्ट की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर बनाया जाता
है जो चौकोर क्रास सैक्शन वाले होते हैं। इसका प्रयोग टूल होल्डर में पकड़कर किया जाता है।

प्रश्न – टिप टूल (Tip Tool) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
इस प्रकार के टूल में एक कार्बन स्टील की शैंक होती है। जिसके सिरे पर टंगस्टन या कोबाल्ट स्टील का टिप जोड़ दिया जाता है। इस टूल का प्रयोग प्रायः हार्ड धातुओं को टर्निंग करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न – लेथ कटिंग टूल ऐंगल्स (Lath Cutting Tool Angles) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लेथ पर जॉब को बांध कर विभिन्न प्रकार की जो क्रियायें की जाती हैं उनको करने के लिए टूल का प्रयोग किया जाता है और जिस टूल में ऐंगल रखा जाता है उसे लेथ कटिंग टूल ऐंगल्स कहते हैं।

प्रश्न – लेथ कटिंग टूल ऐंगल्स कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
यह तीन प्रकार के होते हैं
1- कटिंग ऐंगल (Cutting Angle)
2- रेक ऐंगल (Rake Angle)
3- क्लियरेंस ऐंगल (Clearance Angle)

प्रश्न – गलत टूल गाइडिंग के क्या प्रभाव होंगे ?
उत्तर-
1फ्रंट और साइड क्लियरेंस अधिक होने से कटिंग ऐंगल कमजोर हो जाएगा।
2- फ्रंट और साइड क्लियरेंस अधिक होने से टूल अधिक दबाव सहन नहीं कर सकेगा। और उसकी नोज के टूटने की सम्भावना होगी।
3- टापरेक अधिक होने से हार्ड धातु आसानी से नहीं कटेगी।
4- टापरेक अधिक होने से कटिंग ऐंगल कम और कमजोर हो जायेगा।
5- टापरेक कम होने से एक समान टर्निंग नहीं होगी।
6- टापरेक कम होने से चिप्स निकलने में कठिनाई होगी।
7- साइडरेक कम होने से कटिंग ठीक नहीं होगी।
8- साइडरेक कम होने से कटिंग एक समान नहीं हो पायेगी।
9- साइडरेक कम रखने से कटिंग चिप्स निकलने में कठिनाई होगी।
10- कटिंग ऐंगल अधिक होने से टूल की नोज तेज धारवाली नहीं होगी।
11- कटिंग ऐंगल अधिक होने पर कार्य पर अधिक दबाव पड़ेगा जिससे फिनिशिंग अच्छी नहीं होगी।
12- कटिंग ऐंगल कम रखने पर टूल की नोज कमजोर हो जायेगी।
13- कटिंग ऐंगल कम होने पर टूल की नोज कार्य करते समय जल्दी खराब हो जायेगी।

प्रश्न – कटिंग स्पीड (Cutting Speed) किसे कहते हैं ?
उत्तर- कटिंग स्पीड (Cutting Speed)
लेथ पर कटिंग टूल के द्वारा घूमते हुए जॉब की परिधि से प्रति मिनट जितनी धातु काटी जाती है उसे फुट या मीटर में माप लिया जाए तो वह कार्य की कटिंग स्पीड कहलाती है। कटिंग स्पीड की इकाई ब्रिटिश पद्धति में फुट प्रति मिनट (F. P. M.) और मीट्रिक पद्धति में मीटर प्रति मिनट (M.P.M) होती है।

प्रश्न – कटिंग स्पीड किन-किन बातों पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
कटिंग स्पीड आठ बातों पर निर्भर करती है
1- कार्य की धातु
2- टूल की धातु
3- फीड की मात्रा
4- कट की गहराई
5- लेथ का साईज
6- लेथ की दशा
7- कार्य की पकड़
8- लेथ चालक की दशा।

प्रश्न – फीड (Feed) किसे कहते हैं ?
उत्तर-
हैड स्टाक स्पिंडल का एक चक्कर चलाने से कैरेज पर टूल पोस्ट में बंधा टूल जितना आगे बढ़ जाता है उसे फीड कहते हैं। यह कट प्रायः प्रति चक्कर में प्रदर्शित की जाती है। जैसे 0.5 मि० मी० प्रति चक्कर।

प्रश्न – फीड को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से तत्त्व हैं ?
उत्तर-
फीड को प्रभावित करने वाले निम्नलिखित तत्त्व हैं
1- टूल की धातु
2- कार्य की धातु
3- कार्य की फिनिश
4- कार्य का आकार
5- कूलेंट का प्रयोग
6- कट की गहराई
7- मशीन की मजबूती।

प्रश्न – टर्निंग समय (Turning Time) आप कैसे निकालेंगे ?
उत्तर-
लेथ पर कार्य करते समय यदि कार्य की स्पीड, फीड तथा लम्बाई ज्ञात हो तो निम्नलिखित
सूत्र द्वारा टर्निंग समय ज्ञात किया जा सकता है।

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प्रश्न – चक (Chuck) किसे कहते हैं ?

उत्तर- चक, लेथ मशीन पर वर्क या जॉब (Work or Job) को पकड़ने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

प्रश्न – चक कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर- चक चार प्रकार के होते हैं
1- फोर जॉ चक (Four Jaw Chuck)
2- थ्री जॉ चक (Three Jaw Chuck)
3-कालेट चक (Collet Chuck)
4- चुम्बकीय चक (Magnetic Chuck)

प्रश्न – फीड (Feed) किसे कहते हैं ?

उत्तर-हैड स्टाक स्पिंडल का एक चक्कर चलाने से कैरेज पर टूल पोस्ट में बंधा टूल जितना आगे बढ़ जाता है उसे फीड कहते हैं। यह कट प्रायः प्रति चक्कर में प्रदर्शित की जाती है।

प्रश्न – लेथ कैरियर (Lathe Carrier) किसे कहते हैं ?

उत्तर- लेथ कैरियर एक प्रकार की लेथ असेसरी है जिसका प्रयोग दोनों सेंटर के बीच में पकड़े हुए जॉब को हैंड स्टाक स्पिण्डल के साथ घुमाने के लिए किया जाता है। ये प्रायः कास्ट आयरन या ड्राप फोर्ज स्टील के बनाये जाते हैं।

प्रश्न – लेथ कटिंग टूल ऐंगल्स कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर- यह तीन प्रकार के होते हैं
1- कटिंग ऐंगल (Cutting Angle)
2- रेक ऐंगल (Rake Angle)
3- क्लियरेंस ऐंगल (Clearance Angle)

प्रश्न – लेथ मैंड्रल (Lathe Mandrel) किसे कहते हैं ?

उत्तर- लेथ मैंड्रल एक प्रकार की असेसरी है जिसका प्रयोग उन कार्यों पर परिशुद्धता में टर्निंग करने के लिए किया जाता है जिन पर पहले से ही सेंटर में फिनिश किया हुआ सूराख बनाया जाता है। ऐसे कार्यों को मैंड्रल पर फिट कर दिया जाता है और मैंड्रल को लेथ पर दोनों सेंटरों के बीच में कैरियर के साथ पकड़ कर कार्य पर परिशुद्धता में टर्निंग की जाती है। जैसे किसी गिवर को बनाने के लिए पहले उसके ब्लॉक को बनाया जाता है फिर इस मैंड्रल के साथ ब्लॉक को मिलिंग मशीन पर बांधकर दांते काटे जाते हैं और अन्य क्रियायें की जाती हैं। मैंड्रल को प्रायः हाई कार्बन स्टील से बनाकर हार्ड व टेम्पर कर दिया जाता है।