Cooling of transformers in hindi

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Cooling of transformers in hindi

परिणामित्र का शीतलीकरण (Cooling of transformers)

सभी मशीनों में, लोड के बढ़ने के साथ-साथ, हानियाँ (losses) भी बढ़ती हैं, जो मशीनों में ऊष्मा उत्पन्न करती हैं। यदि मशीन में उत्पन्नं ऊष्मा का सही प्रकार से तत्पर विसरण न किया जाए, तो मशीन अत्यधिक गर्म होकर, नष्ट-भ्रष्ट हो सकती है। ट्रांसफॉर्मर एक स्थैतिक युक्ति (static device) है, इसमें कोई-किसी प्रकार का घूर्णी अंग (rotating part) नहीं होता; इसलिए इसके शीतलन (cooling) के लिए, वैद्युत घूर्णी मशीन (electrical rotating machine) के रेडियेटिंग फेन की तरह, कोई स्व-घूर्णित शीतलन युक्ति (self-rotated cooling device) नहीं लगाई जा सकती। फलतः ट्रांसफॉर्मर का शीतलीकरण घूर्णन मशीन की अपेक्षा, अति कठिन होता है।

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परिणामित्र के शीतलन की विधियाँ (Methods of cooling of a transformer)

(i) प्राकृतिक शीतलन विधि (Natural cooling method)

(ii) कृत्रिम शीतलन विधि (Artificial cooling method)

(a) “प्रणोदित/बलित’ वायु शीतलन विधि (Blast/forced air cooling method) अथवा, कृत्रिम वायु शीतलन Parfe (Artificial air cooling method)

(b) तेल निमज्जित प्राकृतिक शीतलन विधि (Oil immersed natural cooling method)

(c) तेल निमज्जित, “प्रणोदित बलित”, वायु शीतलन विधि (Oil immersed, blast/forced air cooling method)

(d) तेल निमज्जित अर्थात् तेल में डूबे हुए, जल शीतलन विधि (Oil immersed water cooling method)

(e) परिभ्रामी तेल-जल शीतलन विधि (Circulated oil-water cooling method

परिणामित्र की प्राकृतिक शीतलन विधि (Natural cooling method of transformer)

5 kVA तक की क्षमता वाले अति लघु ट्रांसफॉर्मर के शीतलीकरण के लिए किसी अन्य अतिरिक्त कृत्रिम स्रोत (other artificial source) की आवश्यकता नहीं होती है; क्योंकि इनके अन्दर उत्पन्न न्यून ऊष्मा के विसरण के लिए, इनका सतह क्षेत्र अथवा इनके आवरण का पृष्ठ क्षेत्र ही उपयुक्त होता है। इन ट्रांसफॉर्मरों का प्रयोग (use) प्रायः प्रयोगशालाओं, कार्यशालाओं परीक्षणशालाओं आदि में न्यून वोल्टता की सप्लाइ के लिए होता है। इस विधि को परिणामित्र की प्राकृतिक वायु शीतलन विधि भी कहते हैं।

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चित्र 12.22. एयर ब्लास्ट कूल्ड ट्रांसफॉर्मर

परिणामित्र की कृत्रिम शीतलन विधि (Artificial cooling method of transformer)

10 kVA से अधिक क्षमता वाले अर्थात् बड़े ट्रांसफॉर्मरों के शीतलीकरण के लिए शुष्क वायु (dry air), विद्युतरोधी तेल (insulating oil), कृत्रिम ठण्डे पानी (cold water) आदि-आदि अतिरिक्त कृत्रिम स्रोतों की आवश्यकता होती है, जिनके द्वारा ट्रांसफॉर्मरों को कृत्रिम शीतलन प्रदान किया जाता है। इसकी मुख्य विधियाँ अग्रवर्णित हैं।

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परिणामित्र की ‘बलित या प्रणोदित’ वायु (Forced or Blast air cooling method of transformer)

इस विधि के अन्तर्गत, ट्रांसफॉर्मर को शुद्ध व शुष्क वायु के झोंके (blast/forced of air) द्वारा शीतलीकरण प्रदान किया जाता है। इसके लिए ट्रांसफॉर्मर टैंक को पतली लोह चादर (thin iron sheet) से बनाया जाता है और यह टैंक, ऊपर तथा नीचे (top and bottom) दोनों सिरों से खुला हुआ होता है। इसमें ट्रांसफॉर्मर की एसेम्बली (core and coil winding) को स्थापित किया जाता है, और फिर शुद्ध (धूल रहित) तथा शुष्क (नमी रहित) वायु का झोंका सतत प्रदान किया जाता है, जैसा कि चित्र 12.23 से स्पष्ट है।

इस विधि के अन्तर्गत सबसे बड़ी कमी यह है कि वायु झोंका के साथ आने वाले धूल के कण तथा नमी प्रत्यक्ष वाइंडिंग के सम्पर्क में आने के कारण, विद्युतरोधन क्षतिग्रस्त हो जाता है और कभी-कभी शीतलन नलिकाएँ (cooling ducts) धूल के कारण, जाम (बन्द) हो जाती हैं; इसलिए इस विधि को प्रायः उन्हीं स्थानों पर अपनाया जाता है, जहाँ पर शीतलन के लिए पानी की सुविधा नहीं होती है अथवा पानी अधिक महंगा पड़ता है।

परिणामित्र की तेल निमज्जित प्राकृतिक वायु शीतलन विधि(Oil immersed natural air cooling method of transformer)

इस विधि के अन्तर्गत, ट्रांसफॉर्मर एसेम्बली (core and coil winding)को तेल भरे हुए टैंक में डुबाकर रखा जाता है।यह तेल ताप का सुचालक, परन्तु विद्युत का कुचालक होता है; इसलिए इसे विद्युतरोधी तेल (insulating oil) कहते हैं। शीतलन क्रिया (cooling action) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए, ऑइल टैंक की बाह्य सतह पर ताप विकिरके (heat radiators) लगी होती हैं, जिन्हें शीतलन नलिकाएँ (cooling ducts) कहते हैं। तेल को प्रदूषण (pollution) से बचाने के लिए ऑइल टैंक को वायुरोधी (air tight) तथा जलरोधी (water tight) बनाया जाता है।

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चित्र 12-24. तेल में डूबा हुआ प्राकृतिक वायु द्वारा शीतलित परिणामित्र

ट्रांसफॉर्मर की कार्यकारी स्थितियों में कोर तथा कॉइल वाइंडिंग में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जो संवहन (convection) की क्रिया द्वारा सम्पूर्ण तेल में समान रूप से फैल जाती है। यह ऊष्मा तेल से मेटल टैंक की दीवारों (पृष्ठों) तथा ताप विकिरकों (heat radiators) द्वारा ग्रहण की जाती है और फिर वायुमण्डलीय वायु को प्रदान की जाती है। इस प्रकार यह शीतलन क्रिया सम्पन्न होती है। आजकल इस विधि का प्रयोग, विद्युत-केन्द्रों तथा उपकेन्द्रों पर 2 MVA तक क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मरों के शीतलन के लिए सर्वाधिक होता है। प्रायः डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, इसी प्रकार शीतलित किए जाते हैं।

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परिणामित्र की तेल निमज्जित ‘प्रणोदित या बलित’ वायु शीतलन विधि (Oil immersed blast or forced air cooling method of transformer)

प्रस्तुत विधि उक्त “तेल निमज्जित तथा प्रणोदित वायु”, दोनों प्रकार की शीतलन विधियों का संयोग (combination) है, जिसमें शीतलन की तेल निमज्जित विधि को प्रणोदित वायु विधि द्वारा प्रभावी तथा कार्यक्षम्य (effective and efficient) बनाया जाता है। इस विधि में उपर्युक्त प्रणोदित वायु शीतलन विधि की तरह शुद्ध तथा शुष्क वायु की आवश्यकता नहीं होती; क्योंकि कोर तथा वाइंडिंग प्रत्यक्ष वायु के सम्पर्क में नहीं आते हैं। इस विधि में ऑयल टैंक के नीचे किनारों पर चारों ओर स्वचालित प्रणोद पंखे (self operated draft fans) स्थापित करके, विकिरकों के साथ वायु सम्पर्क (frequent) बनाया जाता है। ये प्रणोद पंखे, ट्रांसफॉर्मर के तापक्रम के बढ़ने पर स्वतः चालू हो जाते हैं और एक निश्चित तापक्रम से न्यून तापक्रम पर स्वतः ही बन्द (off) हो जाते हैं। यह कार्य एक ताप रिले (thermal relay) द्वारा होता है।

परिणामित्र की तेल निमज्जित जल शीतलन विधि (Oil immersed water cooling method of transformer)

इस विधि के अन्तर्गत, ट्रांसफॉर्मर-एसेम्बली (core and winding) को विद्युतरोधी तेल से भरे हुए मेटल टैंक में डुबोकर रखा जाता है और तेल को ठण्डे पानी के परिभ्रमण (circulation) द्वारा ठण्डा रखा जाता है। यह क्रिया टैंक के तेल में डूबी हुई कुण्डलाकृत नलियों में शीतल जल (cold water) गुजारकर, सम्पन्न की जाती है। इस विधि में सबसे बड़ी कमी यह है कि तेल दाब की अपेक्षा, शीतल परिभ्रामी जल (cold circulated water) का दाब अधिक रहता है; इसलिए पाइप-लीकेज की स्थिति में पानी टैंक के तेल में मिल सकता है और तेल दूषित होकर, कॉइल वाइंडिंग को नष्ट (damage) कर सकता है। इस कमी को दूर करने के लिए पानी की अपेक्षा, तेल को अधिक उच्च दाब पर कायम रखना उचित होगा; जिसके लिए निम्नलिखित विधि अपनायी जाती है।

परिणामित्र की परिभ्रामी तेल निमज्जित जल शीतलन विधि (Circulated oil immersed water cooling method of a transformer)

इस विधि के अन्तर्गत, ट्रांसफॉर्मर के परिभ्रामी तप्त तेल (circulated hot oil) को चक्रामी शीतल जल (circulated cold water) द्वारा शीतलित किया जाता है। इसके लिए टैंक में भरे हुए तप्त तेल को पम्प की सहायता से एक जल शीतलक (water cooler) से होकर गुजारा जाता है। इस विधि में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि शीतल जल की अपेक्षा, तप्त तेल का दाब उच्च रहे; ताकि तेल में पानी न मिल सके।

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