Spark plug kya hota hai – Types of spark plugs & working

Spark plug kya hota hai – Types of spark plugs & working

स्पार्क प्लग (Spark Plug)

स्पार्क प्लग इन्जन के प्रज्वलन तन्त्र (ignition system) का एक पार्ट होता है। यह इन्जन के दहन कक्ष (combustion chamber) के ऊपर लगा होता है जहाँ उच्च तापमान और दाब के अन्तर्गत यह कार्य करता है। एक आधुनिक काट के दहन कक्ष का तापमान 2500°C और दाब 7 MPa तक हो सकता है

Spark plug kya hota hai

वाशर बनावट (Construction) चित्र 11.30 में एक स्पार्क-प्लग की काट का दृश्य दिखाया गया है

स्पार्क-प्लग के तीन मुख्य भाग होते हैं-

(1) सेन्टर इलैक्ट्रोड

(2) ग्राउण्ड इलैक्ट्रोड तथा

(3) इन्सुलेटर

इसके अतिरिक्त इसमें बॉडी शैल (body shell), सीलिंग रिंग (scaling ring) और गास्केट (gasket washer) भी होते हैं।

सेन्टर इलेक्ट्रोड के ऊपरी सिरे पर स्पार्क प्लग टर्मिनल होता है। इस टर्मिनल पर H.T. केबल जुड़ती हैं। यह केबल इग्नीशन-क्वायल (ignition coil) से स्पार्क प्लग टर्मिनल पर उच्च वोल्टता की धारा प्रवाहित करती है। ( एकल सिलिण्डर इन्जन के लिये ) बहु सिलिण्डर इन्जन से स्पार्क प्लग H.T. केबल द्वारा डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़े होते हैं ।

सेन्टर इलैक्ट्रोड का दूसरा सिरा इन्सूलेटर से होकर बाहर निकलता है और ग्राउण्ड इलैक्ट्रोड से गेप बनाता है । इन्सुलेटर, सेन्टर इलैक्ट्रोड और शैल (shelt) के बीच लगा होता है। यह सेन्टर इलैक्ट्रौड और शैल के बीच उच्च वोल्टता धारा की लीकेज को रोकता है ।

स्पार्क(Spark) – प्लग के बॉडी शैल के अन्दर इन्सुलेटर और इलैक्ट्रोड स्थित होते हैं। इन्सुलेटर से इलैक्ट्रोड और शैल दोनों ही इन्सुलेट होने चाहिये। इसलिये एक गैस-टाइट सील (gas-tight seal) की आवश्यकता होती है। यह सील एक ठोस रिंग के रूप में हो सकती है जैसाकि चित्र में दिखाया गया है। इसके अतिरिक्त किसी शुष्क-पाउडर (dry powder) या ग्लास के बुझे हुये धातु-पाउडर का भी प्रयोग किया जा सकता है।

स्पार्क प्लग, क्योंकि दहन-कक्ष के ऊपर लगा होता है, इसलिये दहन कक्ष की स्पार्क प्लग से लीक होकर सिलिण्डर-हैड में जा सकती हैं इस लीकेज को रोकने के लिये एक गैसकेट वाशर का प्रयोग किया जाता है।

क्रिया (Working) – स्पार्क प्लग के सेन्ट्रल इलैक्ट्रोड को इग्नीशन क्वायल या डिस्ट्रीब्यूटर से जोड़ा जाता ग्राउण्ड क्रिया-स्पार्क प्लग के सेन्ट्रल इलैक्ट्रोड को इग्नीशन क्वायल या डिस्ट्रीब्यूटर से जोड़ा है तो इलैक्ट्रोड से उच्च वोल्टता वाली धारा बहती है। यह धारा सेन्ट्रल इलैक्ट्रोड और इलैक्ट्रोड के बीच अवकाश (gap) से गुजरती है। गैप में वायु प्रतिरोध के कारण स्पार्क उत्पन्न होती है और स्पार्क से चार्ज का प्रज्वलन और दहन होता है।

पदार्थ (Material) – स्पार्क प्लग के पार्टस निम्नलिखित पदार्थों के बने होते हैं

बॉडी शैल (Body shell) — यह निम्न कार्बन इस्पात (low carbon stecl) का बना होता है। इस पर कोल्ड रोल्ड चूड़ियाँ बनी होती हैं।

इन्सुलेशन (Insulation) – इन्सुलेशन पदार्थों के मुख्य रूप से पोर्सलीन, माइका तथा सिंटर्ड एल्यूमिना (sintered alumina) प्रयोग किये जाते हैं। आजकल सिंटर्ड एल्यूमिना ही अधिकतर प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह पोर्सलीन से अधिक सामर्थ्यवान होता है तथा इसकी ऊष्मीय चालकता भी पोर्सलीन से अधिक होती है।

सेन्टर इलैक्ट्रोड (Center electrode) – यह सिलिकॉन-मैगनीज-निकिल ऐलॉय के बने होते हैं।

ग्राउण्ड इलैक्ट्रोड (Ground electrode) – यह निकिल या निकिल-मैग्नीज ऐलॉय के बने होते हैं।

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