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Structure of Small Transformer in hindi | Core Type Small Transformer

Structure of Small Transformer : स्मॉल ट्रांसफॉर्मर की संरचना (Construction)

स्मॉल ट्रांसफॉर्मर (Structure of Small Transformer) का तात्पर्य लघु ट्रांसफॉर्मर से है, जिनका प्रयोग (use) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग क्षेत्र में होता है। इसकी संरचना, सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मर की तरह ही होती है, जिसकी संरचनात्मक व्याख्या पूर्व अनुच्छेद में जा चुकी है। विदित है कि सभी स्मॉल ट्रांसफॉर्मर, सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मर ही होते हैं। चित्र 12.12 में दो भिन्न-भिन्न प्रकार के स्मॉल ट्रांसफॉर्मर की सम्पूर्ण आन्तरिक संरचना प्रदर्शित की गई है। मूल रूप से स्मॉल ट्रासफॉर्मर निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं

(i) क्रोड प्ररूपी लघु परिणामित्र (core type small transformer)

(ii) कोश प्ररूपी लघु परिणामित्र (shell type small transformer)

(i) क्रोड प्ररूपी लघु परिणामित्र C.T.S.T. (Core Type Small Transformer)- चित्र – (a) में कोर टाइप स्मॉल ट्रांसफॉर्मर की आन्तरिक संरचना दर्शायी गई है। इसमें प्रयुक्त कोर L अथवा U तथा [प्रकार की लोह पत्तियों (ferrite strips) का फ्लक्स (Flux) सुसंगठित रूप में आयताकार बना होता है। इन पत्तियों की मोटाई लगभग 0.1 मिमी होती न्यून वोल्टता कुण्डलन (L.T. Winding) है। कोर की साइड लिम्बों पर H.T. तथा L.T. कॉपर कॉइल वाइंडिंग्स होती हैं। इसमें वाइंडिंग प्रायः संकेन्द्री विधि (concentric method) से होती है, जिसमें L.T. वाइंडिंग को कोर के निकट तथा H.T. वाइंडिंग को ( कोर से दूर अर्थात् L.T. वाइंडिंग के ऊपर रखा गया हैं।

Structure of Small Transformer in hindi
Structure of Small Transformer in hindi

(ii) कोश प्ररूपी लघु परिणामित्र (S.T.S.T.) – चित्र 12-12 (b) में शेल टाइप स्मॉल ट्रांसफॉर्मर की आन्तरिक संरचना दर्शायी गयी है। इसमें प्रयुक्त कोर प्रायः E तथा ! प्रकार की लोह पत्तियों का सुसंगठित रूप से क्षैतिज अंग्रेजी अक्षर 8 की आकृति का बना होता है, जिसकी मध्य लिम्ब पर H.T. तथा L.T. कॉपर-काइँल वाइंडिंग्स होती हैं। इसमें कॉइल स्थापन के लिए प्रायः अन्तर्निविष्ट कुण्डलन विधि (sandwich winding method) का प्रयोग किया जाता है, जिसमें L.T. वाइंडिंग के मध्य H.T. वाइंडिंग को स्थापित करके, क्रोड (core) से दूर रखा गया है।

Structure of Small Transformer in hindi
Structure of Small Transformer in hindi

टिप्पणी (Note) – स्मॉल ट्रांसफॉर्मर के प्रमुख अंग जैसे

(i) कोर,

(ii) वाइंडिंग,

(iii) इंस्यूलेशन,

(iv) कंटेनर,

(v) टर्मिनल बाक्स आदि सभी अंग सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मर की तरह ही होते हैं, जिनका विस्तृत विवरण पूर्व अनुच्छेद में किया जा चुका है

स्थिर वोल्टता परिणामित्र (Constant voltage transformer)
इसका तात्पर्य उस सिंगल फेज़ स्मॉल ट्रांसफॉर्मर से है, जिसकी निर्गत वोल्टता, निवेश वोल्टता के परिवर्तित होने पर भी परिवर्तित नहीं होती, अपितु स्थिर रहती है अथवा स्थिर रखी जा सकती है। ये ट्रांसफॉर्मर कई प्रकार के हो सकते हैं। यहाँ पर केवल दो प्रकार के स्थिर वोल्टता वाले ट्रांसफॉर्मरों की व्याख्या की जा रही है।

अंशनिष्कासित स्वपरिणामित्र प्ररूपी स्थिर वोल्टता परिणामित्र

(Tapped auto-transformer type constant voltage transformer)
यह स्वपरिणामित्र का ही एक विकसित रूप है; इसलिए इसमें केवल एक वाइंडिंग होती है। इसकी सेकण्डरी साइड में वाइंडिंग का लगभग पचास प्रतिशत (50%) भाग अंशनिष्कासित (tapped) होता है। ये अंशनिष्कासनें (tappings), एक ‘रोटरी स्विच’ के सम्पर्कों (contacts) से जुड़ी रहती हैं। रोटरी स्विच की सहायता से निर्गत वोल्टता को स्थिर रखा जाता है। प्राइमरि साइड में एक ‘सलेक्टर स्विच’ लगा होता है। इसमें उच्च (up) तथा निम्न (down) स्थिति वाले दो स्थिर सम्पर्क होते हैं, जो वाइंडिंग की क्रमशः मध्य तथा अन्तिम अंशनिष्कासन से जुड़े रहते हैं। इसका चल सम्पर्क, विद्युत-प्रदाय से जुड़ा रहता है। सलेक्टर स्विच की सहायता से वाइंडिंग की दो स्थितियों पर वोल्टता प्रदान की जाती है, जिससे ट्रांसफॉर्मर स्टेप-अप तथा स्टेप-डाउन की तरह कार्य करता है।

संतृप्त क्रोड प्ररूपी स्थिर वोल्टता परिणामित्र

(Saturated core type constant voltage transformer) यह दो वाइंडिंग्स वाला ट्रांसफॉर्मर होता है, जिसका क्रोड न्यून धारा पर ही संतृप्त (saturate) हो जाता है। इससे क्रोड में मॉग्नेटिक फ्लक्स स्थिर हो जाता है। अब यदि स्थिर आवृत्ति पर निवेश वोल्टता बढ़ती है, तो निवेश धारा भी बढ़ेगी; परन्तु कोर संतृप्ति के कारण, फ्लक्स नहीं बढ़ेगा। फलतः निर्गत वोल्टता स्थिर रहेगी।

त्रिकला परिणामित्र के संयोजन

थ्री-फेज ट्रांसफॉर्मर, पूर्व वर्णित तीन सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मरों का ही एक संयुक्त रूप (combined form) है, जिसमें तीन प्राथमिक तथा तीन द्वितीयक सममित कुण्डलने (symmetrical windings) होती हैं, जो स्टार (y) या डेल्टा (∆) में संयोजित रहती हैं। इस प्रकार संयोजन के अनुसार, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉमर्स मूल रूप से निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं, जिन्हें चित्र

(i) स्टार-स्टार त्रिकला परिणामित्र (y -y ), 3 – , transformer)
(ii) डेल्टा-डेल्टा त्रिकला परिणामित्र (∆-∆, 3 – , transformer)
(iii) स्टार-डेल्टा त्रिकला परिणामित्र (y-∆, 3 – , transformer)
(iv) डेल्टा-स्टार त्रिकला परिणामित्र (∆-y, 3-h, transformer)

त्रिकला परिणामित्र की संरचना (Construction of three phase transformer)

चित्र 12-14 में थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर के आन्तरिक ढाँचों (internal frames)को प्रदर्शित किया गया है, जो ‘कोल्ड रोल्ड ग्रेन ओरिएंटिड सिलिकॉन स्टील’ के विद्युतरोधी वार्निश से लेपित पटलों (laminations)के बने होते हैं। ट्रांसफॉर्मर में इनका उपयोग चुम्बकीय परिपथ के लिए होता है। चुम्बकीय परिपथ के अनुसार, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर्स निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं

Structure of Small Transformer in hindi
चित्र 12-14. कोर टाइप, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर्स के मॉग्नेटिक सर्किट्स

(i) क्रोड प्ररूपी, त्रिकला परिणामित्र (core type three phase transformer)

(ii) कोश प्ररूपी, त्रिकला परिणामित्र (shell type three phase transformer)

कोर टाइप, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर की संरचना अपेक्षाकृत अति सरल होती है; इसलिए आजकल व्यवहारिक रूप से ( इसका प्रयोग (use) अधिक होता है। भुजाओं के अनुसार, इसके चुम्बकीय परिपथ पुनः निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं

(i) तीन भुजाओं वाला चुम्बकीय परिपथ (Three limbs type magnetic circuit)—यह चित्र 12.14 (a) में प्रदर्शित किया गया है। इसका उपयोग (use) प्रायः त्रिभुजाकार क्रोड प्ररूपी, त्रिकला परिणामित्र (3-limbs, core type, 3 – , transformer) में होता है।

(ii) पाँच भुजाओं वाला चुम्बकीय परिपथ (Five limbs type magnetic circuit)—यह चित्र 12.14 (b) में प्रदर्शित किया गया है। इसका उपयोग (use) पंच-भुजाकार क्रोड प्ररूपी, त्रिकला परिणामित्र (5-limbs, core type, 3 – , transformer)में होता है।

(i) थ्री-लिम्ब, कोर टाइप, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर की आन्तरिक संरचना इसकी प्रत्येक भुजा (limb) पर केवल समान कला (same phase) की प्राथमिक तथा द्वितीयक दोनों कुण्डलनें (windings) स्थापित रहती हैं; परन्तु यहाँ पर चित्र में केवल एक ही कुण्डलन प्रदर्शित की गई है। इसी प्रकार फाइव लिम्ब कोर टाइप थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर में मध्य की तीन भुजाओं (limbs) पर ही सममित कुण्डलने (symmetrical windings) स्थापित की जाती हैं। पक्ष वाली अन्य दो भुजाओं पर कोई किसी प्रकार की कुण्डलन स्थापित नहीं की जाती।

(ii) (b) में शेल टाइप, थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर की आन्तरिक संरचना जिसमें मध्य वाली तीनों भुजाओं (limbs) पर पहले की भाँति ही त्रिकला सममित कुण्डलने स्थापित की जाती हैं; अर्थात् प्रत्येक

(a) कोर टाइप ट्रांसफॉर्मर

(b) शेल टाइप ट्रांसफॉर्मर

भुजा पर समान कला की प्राथमिक तथा द्वितीयक, दोनों कुण्डलनें स्थापित की जाती हैं, परन्तु यहाँ पर चित्र में केवल एक थ्री-फेज़ वाइंडिंग ही प्रदर्शित की गई है।

त्रिकला परिणामित्र के लाभ (Advantages of three phase transformer)

समान निर्धारण (similar rating) वाले तीन सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मरों की अपेक्षा, एक तुल्य क्षमता (equal capacity) वाले थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं

(i) यह प्रमाप में लघु (small in size) होता है; इसलिए इसमें पदार्थ की मात्रा कम लगती है। अर्थात् इसकी संरचना में लागत (capital cost) कम आती है।

(ii) इसका आकार (size) लघु होता है; इसलिए यह फर्श (floor) पर तथा वरिम (space) में स्थान कम घेरता है।

(iii) यह सादा (simple) सुसंगठित (compact) तथा भार में हल्का (light in weight) होता है।

(iv) छः सिरों (six terminals) की अपेक्षा, इसके केवल तीन सिरे (three terminals) ही बाहर आते हैं। इससे इसका संयोजन (connection) सुगम तथा परिपथ सरल हो जाता है।

त्रिकला परिणामित्र में कमियाँ (Drawbacks) तीन सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मरों की अपेक्षा, एक थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर के प्रयोग (use) में निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है

(i) थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर में किसी एक फेज़ की वाइंडिंग जलकर नष्ट (damage) हो जाने पर प्राय; तीनों फेज़ों की वाइंडिंग्स का नवीनीकरण पुनः करना पड़ता है, जबकि तीन सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मरों में ऐसा नहीं करना पड़ता।

(ii) तीन सिंगल फेज़ ट्रांसफॉर्मरों में किसी एक फेज़ की वाइंडिंग जलकर नष्ट हो जाने के बाद, उसे ओपन डेल्टा सर्किट ट्रांसफॉर्मर की तरह प्रयोग (use) में लाया जा सकता है, जबकि एक थ्री-फेज़ ट्रांसफॉर्मर को प्रयोग (use) में नहीं लाया जा सकता।

विद्युतरोधन अर्थात् इंस्यूलेशन (Insulation)

ट्रांसफॉर्मर में कुण्डलन को क्रोड से पृथक् (isolate) रखने, न्यून वोल्टता की कुण्डलन (1.t, winding) को उच्च वोल्टता की कुण्डलन (h.t. winding) से विलग (isolate) करने तथा कुण्डलन की परतों (layers) को एक-दूसरे से पृथक् करने के लिए,

कई प्रकार के कागजी विद्युतरोधकों का उपयोग किया जाता है; जैसे इम्प्रिगनेटिड पेपर, वार्निशयुक्त पेपर, लेदरोइड पेपर, प्रेसफान पेपर, प्रेस बोर्ड आदि। इसके अतिरिक्त विभागीय कुण्डलन (sectional coil winding) की चकतियों (discs) अर्थात् खण्डों को विलग करने के लिए विद्युतरोधी कार्ड-बोर्ड का उपयोग स्थानक (spacer) की तरह होता है।

पात्र ‘अथवा’ टंकी अर्थात् टैंक (Tank)

कोर तथा वाइंडिंग की एसेम्बली को माइल्ड-स्टील के टैंक में रखा जाता है, जिसमें विद्युतरोधी तेल (insulating oil) भरा रहता है। इस तेल को प्रायः ट्रांसफॉर्मर ऑयल कहते हैं। टैंक का कार्य, ट्रांसफॉर्मर एसेम्बली (कोर तथा वाइंडिंग) को सुरक्षा प्रदान करना, तेल को धारण करना, तेल द्वारा शीतलन प्रदान करना, सहायक अंगों, युक्तियों, आरोपणों आदि को धारण करना है; इसलिए इसे धारक (container) भी कहते हैं।

छोटे ट्रांसफॉर्मर के टैंक का शीतलन पृष्ठ (cooling surface), प्रायः सादा एवं समतल (simple and plane) होता है; परन्तु बड़े ट्रांसफॉर्मर के टैंक का शीतलन पृष्ठ, शीतलन नलिकाओं (cooling ducts) से आरोपित (mounted) रहता है, जिन्हें ताप विकिरकें (heat radiators) कहते हैं। ये विकिरके प्रायः पाइप या ट्यूब अथवा पंख (pipe or fin) प्ररूपी होती हैं, जो ट्रांसफॉर्मर का शीतलन पृष्ठ बढ़ाकर, शीतलन प्रक्रम (cooling process) को प्रभावी (effective) बनाती हैं। इन्हें नलिकायें (ventilating duct) भी कहते हैं। लघु ट्रांसफॉर्मर के टैंक में एल० टी० तथा एच० टी०, बुशिंग टर्मिनलों के लिए छिद्र बने होते हैं; परन्तु दीर्घ ट्रांसफॉर्मर के ढक्कन (cover) में छिद्र बने होते हैं। बड़े ट्रांसफॉर्मर के साथ ढक्कन भी बड़ा होता है, जिस पर बुशिंग टर्मिनलों को सुगमता से आरोपित किया जा सकता है; जबकि छोटे ट्रांसफॉर्मर के ढक्कन पर बुशिंग टर्मिनलों को स्थापित करना सम्भव नहीं होता। इस प्रकार छोटे ट्रांसफॉर्मर का ढक्कन उठाकर अनुरक्षण करना भी सुगम हो जाता है। कंजरवेटर रहित छोटे ट्रांसफॉर्मर के ऑयल टैंक के पृष्ठ पर एक तेल सूचक (oil indicator) लगा होता है, जो टैंक में तेल की मात्रा को दर्शाता है; परन्तु बड़े ट्रांसफॉर्मर के कंजरवेटर में तेल सूचक लगा होता है, जो तेल के स्तर (level) को प्रदशित करता है।

पात्र का आवरण ‘अथवा’ टंकी का ढक्कन (Cover of tank)

ट्रांसफॉर्मर के टैंक का ढक्कन भी माइल्ड स्टील की चादर (sheet) का बना होता है, जिस पर बुशिंग टर्मिनल्स,कंजरवेटर, गेस रिले (बुखोज रिले), थर्मामीटर आदि आरोपित रहते हैं, जिसका विस्तृत वर्णन नीचे दिया गया है।

  1. तेल स्तर मापी (Oil level gauge)
  2. श्वासक संयोजन नली के लिए छिद्र (Hole for breather connecting pipe)
  3. टोपी सहित वायु तेल भरण छिद्र (Oil filling hole with cap)
  4. टोपी सहित वायु निकास छिद्र (Air outlet hole with cap) अथवा संरक्षक डाट (conservator cap)
  5. संरक्षक अथवा प्रसार टंकी (Conservator or expansion tank)
  6. संरक्षक के आलम्ब (Support of conservator)
  7. बुखोज रिले अथवा गैस रिले (Buchholz relay or gas relay)
  8. संरक्षक को टंकी से मिलाने वाली तेल संयोजक नली (Oil connecting pipe)
  9. पोर्सलेन से बनी हुई न्यून वोल्टता सिरा बुशिंग्स (Low voltage terminal bushings of porcelain)
  10. पोर्सलेन निर्मित उच्च वोल्टता सिरा बुशिंग्स (High voltage terminal bushings of porcelain)
  11. विकिरक (radiator) या तेल परिसंचालक (Oil circulator)
  12. वोल्टता नियन्त्रण के लिए अंश-निष्कास परिवर्तक (Tap changer for voltage control)
  13. श्वांसक संयोजक नली (Breather connecting pipe) 14. सिलिका जेल श्वांसक (Silica gel breather)
  14. डाट सहित तेल निकास वाल्व (Oil drain valve with plug)
  15. फिसलन प्रणाल अथवा आधार प्रणाल (Skid channel or base channel)
  16. विकिरक आलम्ब (Radiator support)
  17. टंकी तथा विकिरक को जोड़ने वाली तेल की नलिका (Oil pipe)
  18. विकिरक को उठाने के लिए कुण्डी काबला (eye-bolt) अथवा उत्थापन पकड़ (lifting lug)

टिप्पणी (Note)- अंश निष्कास परिवर्तक को तेल की टंकी पर प्रतिष्ठापित (installed) किया गया है जबकि टर्मिनल्स बुशिंग्स को तेल की टंकी के ढक्कन (cover of the oil tank) पर आरोपित (mounted) किया गया है।

संरक्षक पात्र अथवा प्रसार पात्र (Conservator tank or expansion tank)

यह मृदु लोह चादर (mild iron sheet) का बना हुआ एक छोटा बेलनाकार सहायक ऑयल टैंक, मुख्य ऑइल टैंक के ऊपर लगा होता है। यह पाइप लाइन द्वारा मुख्य ऑयल टैंक तथा श्वांसक (breather) से जुड़ा होता है। इसका उपयोग प्रायः लार्ज ट्रान्सफॉर्मर के साथ होता है। स्मॉल ट्रांसफॉर्मर के साथ सिर्फ मुख्य ऑयल टैंक का उपयोग ही होता है। इस सहायक ऑयल टैंक के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं

(i) यह मुख्य ऑयल टैंक को सदैव तेल से परिपूर्ण (full) रखता है। (ii) यह अतिरिक्त तेल का संग्रह करता है; इसलिए इसे अतिरिक्त तेल संग्राहक (extra oil storage tank) भी कहते हैं

(iii) वैद्युत भार परिवर्तन के अनुसार, ही इसमें तेल का तल परिवर्तित होता है, जिसे इसके साथ संलग्न तेल तल सूचक (oil level indicator) से देखा जा सकता है।

(iv) वैद्युत भार के घटने तथा बढ़ने से ट्रांसफॉर्मर का आन्तरिक तापक्रम भी क्रमशः घटता तथा बढ़ता है। इससे तेल के आयतन में भी कमी तथा वृद्धि होती है। इस प्रकार यह तेल संकुचन तथा प्रसारण के लिए उचित वरिम (space) प्रदान करता है; इसलिए इसे प्रसारण टैंक (expansion tank) भी कहते हैं।

(v) यह तेल को ऑक्सीकरण (oxidation) से बचाता है; क्योंकि इसमें तेल की कम सतह(surface),वायु के सम्पर्क (contact) में रहती है।

श्वाँसक अर्थात् ब्रीदर (Breather)

यह रंगहीन पारदर्शी काँच से बना हुआ, एक बेलनाकार लघु पात्र (small container) होता है, जिसके आधार में वायुमण्डलीय वायु के आदान-प्रदान के लिए धातु की मजबूत जाली लगी होती है। इसका ऊपरी सिरा एक लम्बी नलिका (tube) द्वारा एयर

Structure of Small Transformer in hindi
Structure of Small Transformer in hindi

टाइट कंजरवेटर के ऊपरी भाग से जुड़ा होता है, जिसमें शुष्क वायु भरी होती है। कंजरवेटर के निचले भाग में ट्रांसफॉर्मर का विद्युतरोधी तेल भरा होता है, जिसका तल, तेल-तल सूचक (oil level indicator) द्वारा देखा जा सकता है। श्वााँसक में सिलिका जेल (silica jel) अथवा कैल्सियम क्लोराइड (CaCl2) जैसा वायु को सुखाने वाला पदार्थ भरा रहता है, जो ट्रांसफॉर्मर की श्वासन क्रिया (breathing action) के समय पर ली जाने वाली वायु की नमी (moisture) को सोख लेता है

ट्रांसफॉर्मर पर, जब वैद्युत भार बढ़ता है, तब उसका तापक्रम बढ़ जाता है। इससे, कंजरवेटर में भरे हुए तेल का आयतन बढ़ जाता है और कंजरवेटर में भरी हुई शुष्क वायु श्वाँसक से बाहर निकल जाती है। इस क्रिया को श्वाँसन (breathing) की बाह्य श्वसन क्रिया (expiration action) कहते हैं। इसके विपरीत ट्रांसफॉर्मर पर, जब वैद्युत भार (load) घटता है, तब उसका तापक्रम घट जाता है। इसके कारण, कंजरवेटर में तेल का आयतन घट जाता है। परिणामस्वरूप वायुमण्डल की शुद्ध हवा श्वाँसक द्वारा शुष्क होकर कंजरवेटर में चली जाती है। इस क्रिया को श्वाँसन की अन्तः श्वसन क्रिया (inspiration action) कहते हैं।

बुशिंग (Bushings)

बुशिंग एक प्रकार का विद्युतरोधी सिरा (insulating terminal) है, जिसके द्वारा ट्रांसफॉर्मर के निवेश तथा निर्गत सिरे संयोजित किये जाते हैं। यह पोर्सलेन या बेकेलाइट की बनी होती है, जिसके अन्दर से कॉपर की एक मोटी छड़ पास होती है। यह छड़ धारावाही चालक का कार्य करती है, जिसका एक निचला सिरा ट्रांसफॉर्मर के अन्दर वाइंडिंग से संयोजित रहता है और दूसरा ऊपरी सिरा बाहर प्रतिष्ठान (installation) से संयोजित रहता है। बुशिंग्स निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं

Structure of Small Transformer in hindi
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(i) ठोस बुशिंग (Solid bushing)यह एक प्रकार की तेल रहित बुशिंग (oil less bushing) है, जो पोर्सलेन की बनी होती है इसका प्रयोग 33 kV से न्यून वोल्टता पर । होता है।

(ii) तेल पूरित बुशिंग (Oil filled bushing)—यह एक प्रकार की तेल से भरी हुई पोर्सलेन निर्मित बुशिंग है, जिसका उपयोग 33 kV से उच्च वोल्टता पर होता है।

नलिका अर्थात् वेन्ट पाइप (Vent pipe)

यह ऊँट की गर्दन-सा, लोह धातु का लम्बा तथा मोटा पाइप होता है, जो ट्रांसफॉर्मर के ऑयल टैंक पर, ऊपर की ओर उठा हुआ लगा होता है। इसका एक निचला सिरा, ट्रांसफॉर्मर के ऑयल टैंक से जुड़ा होता है, जिसमें काँच का एक पतला पर्दा (diaphragm) लगा होता है। ट्रांसफॉर्मर में गैस का दबाव अति अधिक बढ़ने पर काँच का तनुपट (diaphragm) टूट जाता है और गैस बाहर निकल जाती है। इससे ट्रांसफॉर्मर टैंक फटने से बच जाता है। इस निकास नलिका को विस्फोट निकास (explosion vent) भी कहते हैं। ट्रांसफॉर्मर के लिए यह एक यान्त्रिक सुरक्षा युक्ति है, जो गैस दाब पर कार्य करती है और ट्रांसफॉर्मर को विस्फोटित होने से बचाती है।

गैस रिले अथवा बुखोज रिले (Gas relay or Buchholz’s relay)

यह एक प्रकार का मिकॉनिकल कम इलेक्ट्रिकल रिले है, जो ट्रांसफॉर्मर के अन्दर उत्पन्न गैस के दाब पर कार्य करता है; इसीलिए इसे गैस रिले कहते हैं। इसे ट्रांसफॉर्मर के ऊपर अर्थात् ऑयल टैंक के कवर पर, टैंक तथा कंजरवेटर के बीच, पाइप लाइन में संयोजित किया जाता है।

Structure of Small Transformer in hindi
Structure of Small Transformer in hindi

यह ट्रांसफॉर्मर के आन्तरिक प्रदोष की स्थिति में ही कार्य करता है। ट्रांसफॉर्मर के अन्दर होने वाले सामान्य प्रदोष की स्थिति में यह अलार्म सर्किट का स्विच-ऑन करके, प्रदोष की सूचना ध्वनि के रूप में देता है। असामान्य प्रदोष की स्थिति में यह ट्रिप सर्किट का स्विच ऑन करके, सर्किट ब्रेकर की सहायता से ट्रांसफॉर्मर की सप्लाइ को कट-ऑफ कर देता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर सुरक्षित हो जाता है।

विद्युतरोधी तेल अथवा विसंवाही तेल (Insulating oil)

यह रासायनिक विधियों द्वारा तैयार किया गया एक संरक्षक परिणामित्र खनिज तेल (mineral oil) है, जिसे ट्रान्सफॉर्मर शीतक (coolant) की तरह प्रयोग किया जाता है। इसे ट्रान्सफॉर्मर ऑइल, इंसुलेटिंग ऑयल, हाइड्रो कार्बनिक ऑइल, मिनरल ऑइल, कैमिकल ऑइल आदि नामों से जाना जाता है। यह ट्रान्सफॉर्मर एसेम्बली (core and winding) को शीतलन (cooling), विद्युतरोधन (insulation) तथा नमी से सुरक्षा (protection from moisture) प्रदान करता है, जिससे ट्रान्सफॉर्मर की अति भार क्षमता (over load capacity), दक्षता (efficiency) तथा जीवनकाल (life) अर्थात् टिकाऊपन (durability) बढ़ जाती है। इस तेल की शुद्धता की जाँच के लिये समय-समय पर इसकी परावैद्युत सामर्थ्य (dielectric strength) मापी जाती है। अशुद्ध तेल में आग लगने का भय रहता है; इसलिये इसे कार्बुनीकरण, रेशेदार पदार्थ, नमी (moisture) आदि अशुद्धियों से दूर रखने के लिए शुद्ध किया जाता है।

Structure of Small Transformer in hindi

1- पेंचकस (Screw Driver) किसे कहते है ?

2- प्लायर्स (Pliers) किसे कहते है ?

3- वाइस (Vice) किसे कहते है

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