What is Solder in hindi | साफ्ट और हार्ड सोल्डरिंग में अन्तर

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What is Solder in hindi | साफ्ट और हार्ड सोल्डरिंग में अन्तर | सोल्डर और सोल्डरिंग (Solder and Soldering) | Some Important Hints Related to Fasteners (Rivet and Solder ) | Differences between Soft and Hard Soldering | What is Solder in hindi

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 सोल्डर और सोल्डरिंग (Solder and Soldering)

परिचय (Introduction)-धातु के दो या अधिक पार्ट्स को आपस में अर्ध स्थायी रूप से जोड़ने के लिए सोल्डरिंग की जाती है। इसमें ज्वाइंट को जोड़ने के लिए जो माध्यम प्रयोग में लाया जाता है उसे सोल्डर कहते हैं।

सोल्डर (Solder)

सोल्डर एक प्रकार का मिश्रण (Alloy) होता है जिसमें सीसा (Lead) और टिन (Tin) को मिलाया जाता है। साधारण सोल्डर का गलनांक 205°C होता है। इसके अतिरिक्त कई प्रकार के सोल्डर पाए जाते हैं। तालिका में सॉफ्ट सोल्डर और हार्ड हार्ड सोल्डर के विभिन्न मिश्रण दिए गए हैं।

सोल्डरिंग (Soldering)

 यह एक प्रकार की कार्य क्रिया है जिसमें सोल्डर के द्वारा दो या अधिक पार्ट्स को आपस में अर्ध स्थायी रूप से जोड़ा जाता है। सोल्डरिंग प्रायः निम्नलिखित दो प्रकार की होती है-

1. सॉफ्ट सोल्डरिंग (Soft Soldering) : इसमें साफ्ट सोल्डर का प्रयोग करके धातु के दो या अधिक पार्टी को आपस में जोड़ा जाता है।

तालिकाः सोल्डर्स की कम्पोजीशन (Composition of Solders)

साफ्ट सोल्डर

टिन %लैंड % जिंक % गलनांक
5050……205 °C
9505……220 °C
6040……192 °C
336601225 °C
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हार्ड सोल्डर

कॉपर %जिंक % सिल्वर %गलनांक
50…..50870 °C
402040750 °C
55…..45450 °C

2. हार्ड सोल्डरिंग (Hard Soldering)-इसमें सिल्वर सोल्डर या स्पेल्टर का प्रयोग करके दो या अधिक पार्ट्स को आपस में जोड़ा जाता है। हार्ड सोल्डरिंग निम्नलिखित दो प्रकार की होती है।

(क) सिल्वर सोल्डरिंग (Silver Soldering) 

(ख) ब्रेजिंग (Brazing)

सोल्डर का चयन (Selection of Solder)- सोल्डर के चयन को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते

• प्रयोग में लाया जाने वाला स्थान

गलनांक

 • ठोस होने की रेंज

 • स्ट्रैग्थ 

• हार्डनैस 

• सील करने की योग्यता 

.दाम

फ्लक्स (Flux)

जिस माध्यम से ज्वाइंट को साफ किया जाता है उसे फ्लक्स कहते हैं। यह प्रायः द्रव, पेस्ट या पाउडर के रूप में पाया जाता है। जब सोल्डरिंग या ब्रेजिंग की जाती है तो ज्वाइंट के ऊपर फ्लक्स को लगाया जाता है। फ्लक्स के निम्नलिखित मुख्य कार्य होते हैं

1. ज्वाइंट को साफ करना।

2. सोल्डर को शीघ्र पिघलाने और उसका बहाव बढ़ाने।

 3. ज्वाइंट के ऊपर सोल्डर या स्पेल्टर की मजबूत पकड़ लाना 

4. कोरोजन को दूर करना।

किसी धातु या कार्य क्रिया के लिए कौन सा फ्लक्स प्रयोग में लाना चाहिए उसे तालिका में दिया गया है। इसका चयन जोड़े जाने वाले मेटीरियल, सोल्डरिंग प्रोसेस और सोल्डर के वर्किंग तापमान के अनुसार किया जाता है।

तालिकाः धातु एवं फ्लक्स (Metal and Fluxes)

क्र०सं० कार्य क्रिया या धातु
1.साफ्ट सोल्डरिंग 
2.ब्रेजिंग 
3.जी.आई. शीट
4.टिन शीट
5.स्टेनलेस स्टील
6.तांबा   
7.स्टील जिंक क्लोराइड, बोरेक्स.
8. बिजली के उपकरण
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  फ्लक्स

क्र०सं०       फ्लक्स
1. सोल्डरिंग पेस्ट, जिंक क्लोराइड
2.बोरेक्स
3. क्षीण किया हुआ हाईड्राक्लोरिड एसिड
4.साल अमोनयिक
5.फास्फोरिक एसिड
6.जिंक क्लोराइड
7. जिंक क्लोराइड, बोरेक्स
8. रेसिन
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सोल्डरिंग ऑयरन (Soldering Iron)

सोल्डरिंग करने के लिए जिस टूल का प्रयोग किया जाता है उसे सोल्डरिंग ऑयरन कहते हैं। इसके हैंडल, शैंक और टिप तीन मुख्य पार्ट्स होते हैं। प्रायः निम्नलिखित प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन पाए जाते हैं

1. प्लेन सोल्डरिंग ऑयरन (Plain Soldering Iron) – इस प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन में गोल, षट्भुज या अष्टभुज आकार का तांबे का टिप लगा होता है जिसका आगे का सिरा टेपर करके नुकीला बना दिया जाता है। इसका प्रयोग प्रायः हल्के कार्यों के लिए किया जाता है। देखिए चित्र 7.16 (a)।

2. हैचेट सोल्डरिंग ऑयरन (Hatchet Soldering Iron) – इस प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन का टिप प्रायः तांबे का होता है जिसका आकार कुल्हाड़ी जैसा होता है। यह प्लेन सोल्डरिंग ऑयरन की अपेक्षा कुछ बड़े साइज का होता है। इसका प्रयोग प्रायः साधारण कार्यों के लिए किया जाता है। देखिए चित्र ।

3. गैस सोल्डरिंग ऑयरन (Gas Soldering Iron) – इस प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन में एक हॉलो पाइप और एक हॉलो कॉपर टिप होता है जिनको एक हॉलो हैंडल के साथ फिट कर दिया जाता है। हैंडल के सिरे पर गैस का एक फ्लेक्सीबल पाइप फिट कर दिया जाता है जिससे गैस प्रवाहित की जाती है और टिप पर बने हुए हवा के सुराखों में गैस में ज्वाला उत्पन्न होती है और टिप गर्म हो जाता है। इस प्रकार का सोल्डरिंग ऑयरन प्रायः वहां पर प्रयोग में लाया जाता है जहां पर सोल्डरिंग कार्यक्रिया लगातार करनी होती है। देखिए चित्र ।

4. कार्टिज सोल्डरिंग ऑयरन (Cartridge Soldering Iron) – इस प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन में एक कार्टिज चैम्बर होता है जिसके एक सिरे पर कॉपर टिप और दूसरे सिरे पर हैंडल के साथ एक गोल रॉड फिट रहते हैं। चैमबर के अंदर एक कार्टिज रखी जाती है जिसमें मैगनीशियम कम्पाउंड का मिक्सचर भरा रहता है। हैंडल के साथ फिट की हुई रॉड से धक्का लगाकर इसमें ज्वाला उत्पन्न की जाती है जिससे टिप गर्म हो जाता है। एक कार्टिज लगभग 7 मिनट तक सोल्डरिंग ऑयरन को गर्म रख सकती है। इस प्रकार की सोल्डरिंग ऑयरन प्रायः वहां पर प्रयोग किया जाता है जहां पर अधिक कठिन सोल्डरिंग करनी होती है। देखिए चित्र ।

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5. इलेक्ट्रिक सोल्डरिंग ऑयरन (Electric Soldering Iron) – इस प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन को बिजली के द्वारा गर्म किया जाता है जिसके सिरे पर तांबे का एक प्लेन टिप लगाया जाता है। इस सोल्डरिंग ऑयरन का प्रयोग प्राय: हल्के कार्यों के लिए किया जाता है।

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इलेक्ट्रिक सोल्डरिंग आयरन का प्रयोग अधिकतर किया जाता है क्योंकि इसका प्रयोग करने से नुकसानदायक गैसें उत्पन्न नहीं होती और सोल्डरिंग करने वाले ज्वाइंट को यूनिफार्म रूप में स्थिर तापमान पर गर्म किया जा सकता है जिससे ज्वाइंट की क्वालिटी में सुधार आता है। देखिए चित्र ।

 सॉफ्ट सोल्डरिंग की विधि (Method of Soft Soldering) 

 1.जिस ज्वाइंट पर सोल्डरिंग करनी है उसे अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए जिससे मिट्टी की धूल ग्रीस या जंग आदि को हटाया जा सके।

2. सोल्डरिंग आयरन के टिप के फेस पर फाइल लगा कर अच्छी तरह से साफ कर देना चाहिए। 

3. सोल्डरिंग आयरन के टिप के फेस को गर्म करके उस पर फ्लक्स लगाकर टिनिंग कर देनी चाहिए।

4. ज्वाइंट पर फ्लक्स लगा देना चाहिए।

 5. गर्म सोल्डरिंग आयरन को सोल्डर के साथ ज्वाइंट के एक सिरे से शुरु करके धीरे-धीरे दूसरे सिरे तक ले जाना चाहिए जिससे पिघला हुआ सोल्डर ज्वाइंट में बैठता जाएगा। देखिए चित्र 7.181 6. 6.सोल्डरिंग कार्यक्रिया समाप्त होने के बाद पार्ट्स को ठंडा करके साफ कर देना चाहिए।

स्वैटिंग (Sweating)

यह एक प्रकार की साफ्ट चित्र 7.18 सोल्डरिंग है जिसमें प्रायः प्लेन सरफेस पर टिनिंग कार्य क्रिया की जाती है। यह कार्यक्रिया स्प्लिट बुश पर भी की जाती है। इसमें बुश के दोनों भागों की जोड़ी जाने वाली सतहों को टिनिंग अर्थात् साफ्ट सोल्डर की कोटिंग (Coating) कर दी जाती है। फिर दोनों भागों को मिलाकर क्लेम्प कर दिया जाता है और जोड़ वाले स्थानों पर फ्लक्स लगाकर उसे गर्म किया जाता है जिससे स्प्लिट बुश के दोनों भागों को अलग कर दिया जाता है। इस प्रकार प्लेन सरफेस या स्प्लिट बुश पर टिनिंग करने की कार्यक्रिया को स्वैटिंग कहते हैं।

साफ्ट और हार्ड सोल्डरिंग में अन्तर (Differences between Soft and Hard Soldering)

सॉफ्ट सोल्डरिंग

1. इसमें टांका कच्चा बना होता है। 

2. इसमें सॉफ्ट सोल्डर का प्रयोग किया जाता है।

3. सॉफ्ट सोल्डर का गलनांक 450°C से कम होता है। 

4. सॉफ्ट सोल्डरिंग के बाद ज्वाइंट को आसानी से अलग किया जा सकता है।

 5. सॉफ्ट सोल्डरिंग करने के लिए सोल्डरिंग की आवश्यकता होती है

हार्ड सोल्डरिंग

1. इसमें टांका पक्का होता है

 2. इसमें स्पेल्टर या सिल्वर सोल्डर का प्रयोग किया जाता है। 

3. हार्ड सोल्डरिंग के लिए स्पेल्टर या सिल्वर सोल्डर का गलनांक 450°C से अधिक होता है।

 4. हार्ड सोल्डरिंग के बाद ज्वाइंट को आसानी से अलग नहीं किया जा सकता है। 

5. हार्ड सोल्डरिंग करने के लिए भट्टी या ब्लो पाइप ऑयरन की आवश्यकता होती है।

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फास्टनर्स (रिवॅट और सोल्डर) से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण संकेत [Some Important Hints Related to Fasteners (Rivet and Solder)]

 1. सोल्डरिंग सेमी-परमानेंट फास्टनिंग का एक उदाहरण है। 

2. रिवटिंग परमानेंट फास्टनिंग का एक उदाहरण है।

3. रिवट का मेटीरियल प्रायः उस मेटीरियल से साफ्ट रखा जाता है जिस पर उसे फिट करना हो।

 4. रिट हैड को सही आकार देने के लिए रिट स्नैप का प्रयोग करते हैं।

5. कॉकिंग एक प्रकार की क्रिया है, जिसमें कॉकिंग टूल के द्वारा लिकेज रोकने के लिए प्लेट के ऐज को रिवट के चारों ओर से सील किया जाता है। 

6. फुलरिंग एक प्रकार का आपरेशन है जिसमें फुलरिंग टूल के द्वारा लैप प्लेट के ऐजों को सील किया जाता है।

7.साफ्ट सोल्डर का गलनांक से 450°C कम और हार्ड सोल्डर का गलनांक 450°C से अधिक होता है।

8. साफ्ट सोल्डर लैड और टिन का एलॉय है।

9. सोल्डर का तापमान जोड़ी जाने वाली धातु के गलनांक से कम रखना चाहिए।

10. ब्रेजिंग में फिलर धातु स्पेल्टर कहलाती है

 11. इमर्शन ब्रेजिंग प्रायः अधिक मात्रा में उत्पादन करने वाले पार्ट्स पर की जाती है।

12. रिवॅटिंग करते समय हैमर का भार बहुत कम होने से लगातार हैमरिंग करनी पड़ती है जिससे रिवट पर ब्रिटलनैस बढ़ जाती है और यदि हैमर का भार बहुत अधिक होगा तब रिवॅट मुड़ सकती है जिससे हैड यूनिफार्म नहीं बनेगा।

13. लैप ज्वाइंट में प्लेट के सिरे परस्पर ओवरलैप करते हैं।

14. रिवटिड ज्वाइंट की असफलता के कई कारण होते हैं जैसे-

(i) रिवेंट की शियरिंग,

 (ii) धातु की क्रशिंग और स्प्लिटिंग

 (iii) प्लेटों की टियरिंग, 

(iv) गैपिंग,

 (v) बकलिंग।

15. रिवट का साइज उसकी गैंक के व्यास के अनुसार निर्दिष्ट किया जाता है।

16. स्नैप हैड रिवॅट साधारण कार्यों यों के लिए तथा पान हैड रिट भारी बनावट संबंधी कायों के लिए उपयोगी होती है।

17. रिवॅट का व्यास बहुत अधिक होने से वह धातु की क्रशिंग का कारण बनता है।

18. एल्युमीनियम की प्लेटों की रिवटिंग के लिए एल्युमीनियम से बनी रिवट का ही प्रयोग करना चाहिए।

19. प्लेटों की मोटाई की तुलना में रिवट का व्यास अधिक कम होने से वह रिवटिड ज्वाइंट में रिवट की शियरिंग का कारण बनता है।

20. रिवटिंग के लिए प्लेट के ऐज के बहुत नज़दीक सुराख बनाने से रिवटिड ज्वाइंट में धातु की स्प्लिटिंग हो सकती है।

21. रिवटिंग के लिए सुराख बहुत पास-पास करने से रिवटिड ज्वाइंट में प्लेटों की टियरिंग हो सकती है।

22. फुलरिंग टूल के कटिंग ऐज की मोटाई प्लेट की मोटाई के बराबर होती है।

 23. सोल्डरिंग आयरन का बिट कॉपर से बनाया जाता है क्योंकि कॉपर ताप का सुचालक होता है और यह अपने ताप को ज्वाइंट की धातु पर शीघ्रता से ट्रांसफर कर देता है।

24. इलेक्ट्रिकल कम्पोनेंट्स को जोड़ने के लिए सिल्वर ब्रेजिंग की जाती है क्योंकि सिल्वर में इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी होती है।

25. सोल्डरिंग का प्रयोग सरफेसों के बीच मकेनिकल बाण्ड बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग तरल पदार्थ स्टोर करने के लिए लीक प्रूफ सील प्रदान करने के लिए करते हैं।

26. कास्ट ऑयरन की सोल्डरिंग के लिए एल्युमीनियम ऑक्साइड एक अच्छा लीक्विड फ्लक्स है। 

27. सोल्डरिंग के लिए ताप का स्रोत जोड़े जाने वाले पार्ट्स के साइज पर निर्भर करता है।

28. सोल्डरिंग ज्वाइंट खराब बनने का मुख्य कारण आक्साइड फिल्म बनना है।

29. कॉपर, ब्रास, माइल्ड स्टील और टिन प्लेट की सोल्डरिंग के लिए जिंक क्लोराइड एक उपयुक्त फ्लक्स है।

30. कूलिंग विधि के दौरान पीसों के हिलने से घटिया सोल्डर कनेक्शन बनता है जिसे “कोल्ड सोल्डर ज्वाइंट” कहते हैं।

31. इलेक्ट्रिक सोल्डरिंग आयरन अधिक लाभदायक होता है क्योंकि यह यूनिफार्म हीट स्पलाई करता है।

32. स्वैट सोल्डरिंग में प्रयोग में लाया गया सोल्डर दिखाई नहीं देता। 33. स्नैप हैड रिवेंट के हैड की ऊँचाई-7d होती है जहां पर d = रिवॅट का व्यास।

34. रिवॅट होल के सेन्टर से प्लेट के निकटतम सिरे के बीच न्यूनतम दूरी को मार्जिन कहते हैं।

35. कॉकिंग और फुलरिंग टूल्स का प्रयोग करके ज्वाइंट को लीकप्रूफ बनाया जा सकता है। 

36. रिवटिड ज्वाइंट की पूर्ण स्ट्रेंग्थ प्राप्त करने के लिए सही व्यास और लम्बाई वाली रिवॅट का चयन करना अति आवश्यक होता है।

37. लैदर और प्लास्टिक पर रिवॅटिंग करने के लिए बाइफर केटिड रिवॅट उपयुक्त होती है। 

38. रिवटिड ज्वाइंट में यदि रिवॅटों का पिच कम होगा तो रिवटिंग करना मुश्किल होगा।

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